शुक्रवार, 11 जून 2010

अंकिता पुरोहित कागदांश की हिन्दी कविता

अंकिता पुरोहित "कागदांश" की हिन्दी कविता

पिताजी

देखते है सब
मॉं की ममता को,
ममत्व को,
नहीं देख पाता कोई
पिता को
उनके खुशी भरे मन को;
बनती है जब बेटी कुछ
सब सराहते हैं
मॉं के संस्कार ।

नहीं देख पाता कोई
पिता को
उनके मन में
छिपे हुए नाज को,
उनके आत्म विश्वास को।

होती है जब विदा बेटी
देखते है सब
मॉं के आंसुओ को !

नहीं देख पाता कोई
पिता को,
उनके मन में छिपे
दर्द को

विदा करते वक्त
उनके मन में उठते-
अजीब से उफान को,
नहीं देख पाता कोई

अगर कोई देख पाता है
तो वह है बेटी
सिर्फ एक बेटी !

8 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन प्रस्तुति... अपने कथ्य व अभिव्यक्ति दोनों ही स्तर पर प्रभावित करती है........शुभकामनाएं।

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  2. अंकिता...बेटा....जियो.....पिता बडे होते हैं...और पिता को समझ कर बच्चे बहुत बडे होते हैं...कुछ ऐसा लगा मुझे...शुभाशीष.

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  3. कविता अच्छी लिखी है...मन को छू गई...बधाई....मेरा आशीर्वाद सदा साथ है...और लिखो... http://www.ddji.blogspot.com

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  4. नहीं देख पाता कोई
    पिता को......
    अगर कोई देख पाता है
    तो वह है बेटी
    सिर्फ एक बेटी......

    100% sahee baat kahee hai....
    Bahut se batein hum petta ( Father) se seekhte hain...
    Main kabhee vo din bhool hee nahee paungee jis din mere petta ji ne pahle bar mujhe ek drawing bna kar dee, jo mera home work tha. us ke badd main har drawing vesee hee bnane lagee, ur aj main achee painting kar letee hun.

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  5. Ankita Ji,
    Namaste,
    Bahut Bhavuk Rachna likhi hai kuchh panktiyaan dil ko chuune wali hain.
    होती है जब विदा बेटी
    देखते है सब
    मॉं के आंसुओ को !

    नहीं देख पाता कोई
    पिता को,
    उनके मन में छिपे
    दर्द को
    Surinder Ratti

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  6. ANKITA JI, KAVITA KE MADHYEM SE JO VICHAR RAKHE HAIN . [ SHAANDAR , DAMDAAR ,SAMAJHDAAR ]
    BAVUK RACHNA KE LIYE AAP KO BADHAI ..! !

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  7. BHot Sundar KAvita Hai Ankita Ji ..!! Or SAyad YE Ek Beti Ke Allawa Koi Likh Bhi nahi Sakta Tha ..!! Aapki Kavita Pad KE Ek Ser Yaad Aaya Or LAga Ki SAyad App Jaise Bhaav SAyad Us SAyar Ke Bhi Apne Beti Ki Liye Honge.... Arz Hai

    Sariyat Ka takaja Hai Farz Bhi Mazboor KArta HAi ...
    YE KAise Jasan (Nikaah)Hai Jo Lakht-e-Jigarr Ko Dur Karta Hai...

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