शुक्रवार, 7 मई 2010

अंकिता पुरोहित कागदांश की हिन्दी कविता


बेटी
खेलती जब
घर के आंगन में
गूंज जाता था घर
पाजेब की झनकार से


मॉं खिलाती थी खाना
अपने हाथों से
दादी सुनाती थी कहानी
सुनहरी रातों में

पिताजी देते थे ज्ञान
अच्छे संस्कारों के
दादा सुनाते थे किस्से
अपने बीते जमाने के

बहन रखती ख्याल
देती थी साथ
ज्ञान की बातों में
भाई मारता फटकार
मगर दबी दबी सी
मुस्कान के साथ
परन्तु रखता पुरा ध्यान
मेरी हर बातों का

याद आते हैं
वे प्यार भरे दिन
क्यो कर दिया
विदा मुझे वहॉं से
क्यूं बनाया है
यह दस्तूर संसार ने

14 टिप्‍पणियां:

  1. बचपन की यादें और ये रीति? ठीक कहा आपने।

    घर की रौनक जो थी अबतक घर बसाने को चली
    जाते जाते उसके सर को चूमना अच्छा लगा

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. बहुत सुन्दर लिखा है आपने. भविष्य के लिए शुभ-कामनाएं

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  3. सीधी, सच्ची और अच्छी सोच, शब्द और भाव

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  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  5. अब कहां वे दिन वे जज़्वात, वे संस्कार -----सुन्दर स्म्रिति-कविता.

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  6. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  7. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  8. बाई अंकिता,

    कविता भोत सुणी है. बांच'र मन घणो राजी होयो. म्हानै ठा नी हो कै आप भी लिखो हो. आपरी सुन्दर रचना खातर मोकळी-मोकळी बधाई. बड़ा रो आशीर्वाद अर छोटां रो प्यार आपरै सागै है, आप नित नुइं ऊंचाई नै छुओ.

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  9. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
    जनोक्ति.कॉम www.janokti.com एक ऐसा हिंदी वेब पोर्टल है जो राज और समाज से जुडे विषयों पर जनपक्ष को पाठकों के सामने लाता है . हमारा या प्रयास रोजाना 400 नये लोगों तक पहुँच रहा है . रोजाना नये-पुराने पाठकों की संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है . 10 हजार के आस-पास पन्ने पढ़े जाते हैं . आप भी अपने कलम को अपना हथियार बनाइए और शामिल हो जाइए जनोक्ति परिवार में !

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  10. ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

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  11. आ बाई, थे तो भोत सूणी कविता मांडी है.............

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